सुशील भीमटा

 

BYसुशील भीमटा

प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल के कोने-कोने में फल और सब्जी की मंडियां खोल दी गईं जिससे आज प्रदेश के किसानों बागवानों को इतनी सुविधा मिल पाई है कि जिसको बयान करनें के लिए मेरे पास शब्द कम पड़ रहे हैं!—

इस नेक कार्य के लिए दोनों सरकारें बधाई एवं प्रशंसा की पात्र हैं!—विशेषकर किसान बागवान की आवाज को केंद्रीय सरकार तक पहुचानें में कांग्रेस पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री राजा वीरभद्र सिंह जी और जुब्बल-कोटखाई-नावर विधानसभा चुनाव क्षेत्र के जनप्रतिनिधि व पूर्व बागवानी मंत्री नरेन्द्र बरागटा जी का समस्त प्रदेश के फल सब्जी उत्पादकों की ओर से तहेदिल से आभार व्यक्त करना चाहता हूं !—

इन्हीं के प्रयासों से आज हिमाचल का किसान बागवान अपने घर बैठे वह नजदीकी मंडियों में समय रहते अपने उत्पाद का सही मूल्य हांसिल कर पा रहे हैं!—समर्थन मूल्य से लेकर 2000–3000 तक का मूल्य पाना इन शख्सियतों के अनथक प्रयासों और कोशिशों से ही संभव हो पाया है। ये क्रांति आज बागवान किसानों के जीवन में आनें वाली हमारी पीढ़ियों के उत्थान का मुख्य कारण है और बनेगा!

मगर इसके साथ-साथ समय के साथ ये प्रमुख मांग समस्त प्रदेश के बागवान किसानों की ओर से प्रदेश सरकार के वर्तमान माननीय मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर जी के समक्ष रखना चाहता हूं!

मान्यवर आज आप सबों की कृपा से हिमाचल प्रदेश के किसानों, बागवानों को फल सब्जियों के वाजिब दाम तो मिल रहे हैं मगर साथ ही इनके पेमेन्ट का डर रात दिन उत्पादकों को सताता रहता है !—

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photo:PTI

जिससे हमेशा मेहनत का पैसा या तो समय से मिल पाता है या डूब जाता है !—-मान्यवर इसके कारण हैं-कभी लदानीं का भाग जाना या आढ़थी का भाग जाना !—जिसका सारा खामयाजा हमेशा बागवान किसानों को भुगतना पड़ता है !—–

मान्यवर आप स्वयं इस कमीं से अवगत हैं ! ये एक फल सब्जी व्यापार की एक ऐसी कमी है जिसको प्राथमिकता पर दूर किया जाना चाहिए। इस कमी या त्रुटि के रहते प्रदेश किसान बागवान सुरक्षित नहीं है और ना हो सकता है!

मान्यवर पेमेंट (payment) की सुरक्षा के लिए जब तक कोई नियम नहीं बनाया जाएगा तब तक बागवान किसान लाचार रहेंगे!—-पेमेन्ट(payment) देंनें के लिए आढथीयों ही नहीं बल्कि लदानियों के लिए भी कोई नियम बनाया जाना चाहिए तथा एक समय सीमा सरकार द्वारा निर्धारित की जानें पर ही payment सुरक्षित हो पाएगी!–

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मान्यवर अक्सर ऐसे हादसें होतें हैं कि गरीब बागवान किसान की इज्जत दाव पर लग जाती है—जैसे आप सब जानतें हैं इसी दौरान या इसके बाद ही शादी विवाह का शुभ दौर शुरू हो जाता है पर समय पर payment ना मिलने पर किसान बागवानों की इज्जत पर बन आती है इससे बड़ा दुःख क्या हो सकता है कि इन्हें ऐसे समय पर भी उधारी के लिए हाँथ फैलानें पड़ते हैं।

सालों साल हमें आढ़थियों के पास अपनें ही पैसों की या यूँ कहूं कि खून पसीनें की कमाई की भीख मांगनी पड़ती है। payment की सुरक्षा बिना मंडियों की सुविधा का काम अधूरा है मान्यवर!

कृपया इस मांग को प्राथमिकता के तौर पर सुलझानें का प्रयास करें। किसानी,बागवानी पर हमारा वर्तमान और भविष्य निर्भर है मान्यवर!

लेखक स्वतंत्र विचारक हैं तथा हिमांचल प्रदेश में रहते हैं।

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