BYTHE FIRE TEAM

उत्तर प्रदेश के दलित वोटों को साधने के लिए सूबे की योगी आदित्य नाथ सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। योगी आदित्‍यनाथ सरकार ने गुरुवार को राष्‍ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत जेल में बंद भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण को समय से पहले छोड़ने का फैसला किया है। चंद्रशेखर उर्फ रावण को बीते साल सहारनपुर में हुई जातीय हिंसा के आरोप में अरेस्‍ट किया गया था। रावण की रिहाई को योगी सरकार के चुनावी दांव के रूप में भी देखा जा रहा है।

राज्‍य सरकार की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस मामले में सोनू, सुधीर, विलास को पहले ही रिहा किया जा चुका है। अब राज्‍य सरकार ने रावण की मां के प्रत्‍यावेदन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए उनके समय पूर्व रिहाई का फैसला किया है। रावण को पहले एक नवंबर तक जेल में रहना था लेकिन अब उसे जल्‍द ही रिहा कर दिया जाएगा। रावण के अलावा दो अन्‍य आरोपियों सोनू पुत्र नाथीराम और शिवकुमार पुत्र रामदास को भी सरकार ने रिहा करने का फैसला किया है।

तीनों ही लोगों की रिहाई के लिए सहारनपुर के जिलाधिकारी को जरूरी निर्देश दे दिए गए हैं। बता दें कि बीते साल सहारनपुर में जातीय हिंसा हो गई थी जिसमें एक महीने तक जिले में तनाव रहा था। भीम आर्मी संगठन के संस्थापक चंद्रशेखर को प्रशासन ने हिंसा का मुख्य आरोपी मानकर उसके खिलाफ कई मामले दर्ज किए थे। हिंसा के बाद ही चंद्रशेखर जेल में बंद हैं। डीएम सहारनपुर की रिपोर्ट पर चंद्रशेखर के खिलाफ रासुका लगा दिया गया था जिसे लेकर भीम आर्मी ने विरोध जताया था।

माना जा रहा है कि योगी सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले भीम आर्मी और दलितों की नाराजगी को दूर करने के लिए रावण को समय से पहले रिहा करने का फैसला किया है। भीम आर्मी का वेस्‍ट यूपी में काफी प्रभाव है और वह दलित आंदोलन के सहारे इस क्षेत्र में अपनी जड़ें और गहरी करना चाहती है। यही नहीं बीजेपी के शीर्ष नेताओं ने भी स्‍वीकार किया है कि कैराना और नूरपुर में हुए उपचुनाव में बीजेपी की हार की एक बड़ी वजह भीम आर्मी है।

बीजेपी नेताओं ने कहा कि भीम आर्मी ने दलितों और मुस्लिमों को एकजुट करने का काम किया और वोट बीजेपी के विरोध में गए। एक बीजेपी नेता के मुताबिक, ‘पिछले साल जातीय हिंसा के बाद भीम आर्मी लोगों की नजर में आई। जातीय हिंसा के खिलाफ भीम आर्मी का प्रभाव है। कैराना उपचुनाव में भीम आर्मी ने खास तौर पर दो क्षेत्रों नकुर और गंगोह में प्रभाव डाला क्योंकि इन दोनों ही जगहों पर 2 लाख से अधिक वोट हैं। दलितों और मुस्लिमों को एकजुट कर बीजेपी के खिलाफ खड़ा करने में भीम आर्मी सफल हो रही है।’

बता दें कि कैराना उपचुनाव में 54.17% ही मतदान हुआ जो 2014 से 18 फीसदी कम है। 2014 में बीजेपी ने यहां से बड़ी जीत दर्ज की थी और पार्टी को अभी भी उम्मीद है कि अगले साल लोकसभा चुनावों में ज्यादा संख्या में मतदाता घर से निकलेंगे और पार्टी फिर सीट जीतने में सफल रहेगी। पार्टी नेताओं का कहना है कि कैराना हमेशा से ही बीजेपी के लिए एक मुश्किल सीट रही है। माना जा रहा है कि इसी को देखते हुए योगी सरकार ने रावण को छोड़ने का फैसला किया है।

(एनबीटी समाचार एजेंसी से इनपुट के साथ)

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