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गोरखपुर: 15 अगस्त 2024 को जब पूरा देश स्वतंत्रता की वर्षगांठ बना रहा होगा वही देश में पूर्वांचल गांधी डॉक्टर संपूर्णानंद मल्ल ने घोषणा किया है कि वह देश में व्याप्त बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, महंगाई, नफरत, हिंसा, अंधविश्वास तथा पाखंड के विरुद्ध अंशन करेंगे.

इसके लिए बाकायदा इन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अवगत भी कर दिया है. इन्होंने पत्र लिखते हुए कहा है कि मुझे गांधी का स्वराज, भगत सिंह का समाजवाद तथा अंबेडकर का संविधान चाहिए न कम न अधिक.

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए गाँधी जी ने कहा है कि हमारे जीवन एवं स्वतंत्रता पर लगाया गया कर समाप्त किया जाये. जीवन पर कर से अर्थ है-

आटा, चावल, गेहूं, दाल, तेल, चीनी, दवा पर कर, निजी गाड़ियों पर लगा टोल टैक्स एक तरह से हमारे संवैधानिक स्वतंत्रता के अधिकार का हनन है.

यह कितना विरोधाभास है कि जिस देश में 80 करोड़ कंगाल एवं 22 करोड़ कुपोषित हैं उनसे पथकर और जीएसटी वसूला जा रहा है जबकि लाखों रूपये का वेतन और पेंशन उठाने वाले देश के ‘माननीय’ टोल टैक्यूंस से मुक्त हैं.

मै जोर देकर कहूँगा कि बेरोजगारी, गरीबी, महंगाई की आग बुझाइये, शिक्षा, चिकित्सा, रेल सेवा ‘शुल्क रहित” तथा एक समान कीजिये अन्यथा मानवता नजर के सामने मर जाएगी.

आटा, चावल, गेहूं, दाल, तेल, चीनी, दवा, शिक्षा, चिकित्सा, रेलसेवा पर कर समाप्त कर दें. निजी गाड़ियों से टोल टैक्स की वसूली बंद हो या प्रत्येक टोल पर दोनों तरफ एक-एक टोल लेन फ्री करें.

₹50 का डीजल, पेट्रोल, सीएनजी ₹100 में क्यों?. घरेलू गैस सिलेंडर 500 रूपये करें, गरीबों को गैस सिलेंडर फ्री दें, जीएसटी अधिकतम साढे 16% करें, भारी गाड़ियों पर टोल टैक्स ₹1 प्रति किमी कर दें ताकि महंगाई मर जाए.

आपको याद दिलाते चलें कि गाँधी जी ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सहित अनेक जिम्मेदारों को अपने सैकड़ो पत्रों एवं ज्ञापनों में इसे समाप्त करने का निवेदन कर चुके हैं किन्तु उन्हें कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है.

इन्होनें पुनः निवेदन करते हुए कहा है कि ‘कर’ एवं ‘कीमतों’ से जुड़े सभी मनमानी आर्बिट्रेरी ऑर्डर्स’ वापस ले लें अन्यथा सत्य एवं अहिंसा की पूरी ताकत से इसे उसी ढंग से तोड़ेंगे जैसे गाँधी ने अंग्रेजों का नमक कानून तोड़ा था.

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