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गोरखपुर: अगर गौर किया जाए तो यह बात समझ से परे आ रही है कि जब भ्रष्टाचार पर सरकार का जीरो टॉलरेंस नारा है तो भ्रष्टाचार पर सत्याग्रहियों ने क्यों सरकार को ललकारा है?

अब गौर करने की बात है कि जब मुख्यमंत्री योगी के गृह नगर में कैग रिपोर्ट आधारित लोक निर्माण विभाग गोरखपुर में करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार उजागर होता है तो पूरे प्रदेश में लोक निर्माण विभाग का आलम क्या होगा?

आखिर सरकार का भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का नारा कहां गोते लगा रहा है.? बता दें कि विगत 1018 दिनों से तीसरी आंख मानवाधिकार संगठन के सत्याग्रही

लोक निर्माण विभाग मुख्य अभियंता के कार्यालय के मुख्य द्वार पर खुले आसमान के नीचे सत्याग्रह करने को विवश हैं किन्तु कोई पूछताछ नहीं करने वाला है.

अब यह कहना उपयुक्त होगा कि कहीं ना कहीं भ्रष्ट अभियंताओं के भ्रष्ट कारगुजारी में शासकीय तंत्र के बराबर की भागीदारी है अन्यथा इस भौतिक पिपाशा के युग में

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पद चिन्हों पर चलते हुए अहिंसात्मक आंदोलन की एक लंबी यात्रा सत्याग्रहियों द्वारा प्रचलित नजर न आती.

इस सत्याग्रह पर समाज के संवेदनशील लोग इस बात का चिंतन करने पर विवश हैं कि आखिर कैग रिपोर्ट पर सरकार चेतनाशून्य क्यों बनी हुई है. 

यह जानते हुए कि विगत सरकारें कैग रिपोर्ट पर धराशाई हो चुकी हैं, तभी तो यक्ष प्रश्न के समान तब तक निरुत्तर हैं जब तक कैग रिपोर्ट आधारित भ्रष्टाचार पर प्रचलित सत्याग्रह संकल्प का निष्कर्ष परिणाम उजागर नहीं होता.

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