BYRAVI SINGH CHAUHAN

मा. कांशीराम साहब का जन्म 15 मार्च 1934 को बुंगासाहब रोपङ पंजाब मे हुआ था। बुंगासाहब उनका ननिहाल था और गांव था खवासपुर। उन्होंने 1957 से 1964 तक एक्सप्लोसिव रिसर्च एन्ड डेवलपमेंट लेबोरेट्री पुणे में अनुसंधान कार्य किया।

बुद्ध जयंती और डॉ अंबेडकर जयंती की छुट्टी को लेकर हुए विवाद ने कांशीराम के अंदर हलचल पैदा कर दी।
अनुसूचित वर्ग के साथ भेदभाव के कारण उन्होने नौकरी त्याग दी। दीनाभाना द्वारा दी गई, बाबा साहेब की एन्हीलेशन आफ कास्ट पुस्तक पढकर उन्होंने सोये हुए बहुजन समाज को जगाने का निर्णय किया।

6 दिसम्बर 1978 को बामसेफ,6 दिसम्बर 1981 को डी एस-4 तथा 14 अप्रेल 1984 को बसपा का निर्माण किया। बाबा साहब आंबेडकर के बाद कांशीराम साहब एकमात्र ऐसे नेता थे जिन्होने अपनी पांच प्रतिज्ञा कभी नही तोङी वो हैं :-

1- मैं कभी शादी नहीं करूंगा ।

2- मैं कभी घर नहीं जाऊँगा ।

3- मैं अपने लिए कोई सम्पत्ति नहीं बनाऊंगा ।

4- मैं आगे कोई नौकरी नही करूँगा ।

5- मैं किसी सामाजिक समारोह, जन्मोत्सव, विवाह, मृत्यु आदि में नहीं जाऊँगा ।

बहुजन समाज के लिए उन्होंने राजनैतिक सत्ता, आर्थिक मुक्ति, आत्म सम्मान एवम् सामाजिक परिवर्तन का कार्य किया।

सत्ता सामाजिक परिवर्तन का हथियार और बाबा साहब के सच्चे सपूत जेहन में कांशीराम शब्द आते ही मुझे वो साईकल पर धूल फांकता हुआ ,गली गली घूमता ,तीन बाबाओं को लेकर गाँव दर गाँव फिरता और बताता कि ये तीन बाबा हैं भाई जो महाराष्ट्र में हुए हैं।

ये पगड़ी वाला जोतिबा फुले है,ये दूसरा बाबा साहू जी महाराज है।लेकिन तीसरा बाबा पगड़ी वाला नहीं है।ये पैंट कोट और टाई वाला बाबा है। इन लोगों ने आपकी जिंदगी बदली है,लेकिन कहानी अधूरी है।

इसे पूरी करना है ,15-85 की बात को लोगों को समझाकर उन्हें हुक्मरान बनने की बात समझाने वाला,बामसेफ और ds-4 बनाने वाला,अन्धो की आँख बनने वाला,दा पॉलिटिकल बुद्धा ,देश के लिए मर चुके जमीदोज हो चुके बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर को गरीब मज़लूमो की रगो मे जिंदा करने वाले ,चमचो की शामत लाने वाले ,फुले साहू अम्बेडकर को साइकल पर गलि गलि घुमाकर बहुजन इतिहास का डंका बजाने वाले,pay back to society की बात समझाने वाले,भारतीय राजनीति मे भूचाल लाने वाले,दो पहियो दो पैरो पर मूवमेंट चलाकर बहुजनो को राजा बनाने वाले,अत्याचार के खिलाफ गरीब दलित को खड़ा करने वाले,बुद्ध की बात को आगे बढ़ाने वाले,कभी शादी ना करने,कभी घर न जाने वाले,सम्पति न जोड़ने वाले ,गूंगो की आवाज बनने वाले ,दुबक कर ना बैठने वाले,कभी cbi और सरकारो से ना डरने वाले ,संविधान पर BJP को हिलाने वाले , स्टेज पर चढ़कर केंद्र ओर राज्य सरकारो को हिजड़े की औलाद कहकर गरियाने वाले
मनुवाद को खुलकर गरियाने ,पिछडोंं के लिए
मण्डल आयोग लागू करो वरना कुर्सी खाली करो  की बात करने वाला साहेब कांशिराम याद आ जाता है।

मान्यवर जी के परिनिर्वाण दिवस पर उनको उनके बलिदान के लिए नमन करते हुए,हम उन तमाम नाम बेनाम कार्यकर्ताओ को भी नमन करते  जिन्होंने मान्यवर का साथ दिया और उनके कन्धे से कंधा मिलाकर मिशन को आगे बढ़ाया ।
लगभग हजारो सालोंं से चले आ रहे बहुजन महापुरुषो के मिशन को पूरे देस मे फैलाने वाले मान्यवर कांशीराम जी का ये समाज कर्जदार है।

साथियो मान्यवर जी का मानना था की राजनीतिक सत्ता को समाजिक परिवर्तन के लिए प्रयोग किया जा सकता है इसीलिए उन्होंने अंतिम छोर पर खडे दबे कुचले पिछड़े हुुुए इंसान को ऊपर उठाने के लिए संघर्ष किया।

साथियो मान्यवर जी कहते थे की हम सभी change (बदलाव) चाहते है लेकिन वो लोगो से कहते थे की भाई बदलाव लाने के लिए तीन चीज़े चाहिए
आज के युवाओ के लिय हम इसे mathematics (गणित) का सूत्र भी कह सकते है।
वो सूत्र है..

N×D×S=change

N-need (जरूरत)

D-desire (इच्छा,चाह)

S-strentgh (ताकत,शक्ति)

=बदलाव change

इसलिए साथीयोंं  इस सूत्र से हम समझते है की व्यवस्था सही नही है तो उसे बदलने की जरूरत (need)है ,दूसरे सूत्र का मतलब है की क्या व्यवस्था सिर्फ कहने से बदल जायेगी नही,तो फिर हमारे अंदर उसको बदलने की (desire) इच्छा चाहत का होना जरूरी है तीसरे सूत्र strentgh मतलब शक्ति जो अल्पज्न से बहुजन बनकर हर मोर्च पर अपनाई जा सकती है। इन सूत्रो को हमे अपनाना होगा।

एक और चीज जो साहेब जी कहा करते थे की हम लोगों को तीन M से बचना होगा।
ये तीन M हमारे लिए घातक है वो M थे-
M-money(पैसा,धनबल)
M-media (मीडिया)
M-माफिया

इन तीनो का इस्तेमाल मनुवादी लोग हमारे खिलाफ करते आये हैं ,कभी हमे पैसे से लुभाया गया,कभी हमे मीडिया के जरिये बेवकूफ बनाया जाता है  , और यदि फिर भी बस ना चले तो ये लोग माफिया गुंडो का भी सहारा लेते है। हमे इनसे भी पार पाना है और यदि हम इनसे पार पा लेते हैंं तो हमे कामयांब होने से कोई नही रोक सकता।

मैं कभी भी ऐसा प्रधानमंत्री नही बनना चाहूंगा ,जो दूसरों के हाथों में खेले। दुसरो पर निर्भर हो। बल्कि मैं तो कभी MP भी नही बनना चाहता था।
1989 में मेरे पास 2 बार वीपी सिंह आये।
5 बार देवीलाल आये।
2 बार राजीव गांधी आये।

लेकिन मैंने कहा कि मैं आपके सहारे से पार्लियामेंट नही पहुँचना चाहता।
हाँ जिस दिन मेरा पार्लियामेंट में पहला कदम रखूंगा मेरा पहला दिन होगा।
तो मैं तमाम पार्टियो से पूछ लूंगा की मैं अपने बलबूते पर आगे बढ़ा हुँँ।
आप लोगो को रगड़कर आगे बढ़ा हुँँ।

यदि रगड़े में कुछ कमी रह गयी हो तो थोड़ा रगड़ा और लगा देते है।

लेकिन दोस्तो बेहद ही दुखद घटना 9 अक्टूबर 2006 को घटी हमारा मशीहा हमे छोडकर परिनिर्वाण को प्राप्त हो गया ।
एक कार्यकर्ता और अनुयायी के सब्दो मे उनके परिनिर्वाण पर जो दृश्य था –

लाखों लोग अपने मशीहा की एक झलक पाने के लिए लोग बेताब थे,लेकिन मशीहा था की उठने का नाम ही नही ले रहा था।
लोग लगातार उद्दघोष कर रहे थे
बाबा तेरा मिशन अधूरा ।
कांशीराम करेगा पूरा।।” 

कुछ लोग जोर से नारा लगाकर मशीहा को जगाने की कोशिश कर रहे थे वे कह रहे थे-

कांशीराम तेरी नेक कमाई।
तूने सोती कोम जगाई।।

कांशीराम तेरी सोच पे।
पहरा देंगे ठोक के।।

लेकिन मशीहा चद्दर लिए ऐसे सो गया था की अब किसी से बात नही करेगा।लेकिन लोगो को अपनी नम आंखो पर भी यकीन नही हो रहा था,मानो ऐसा लग रहा था की मशीहा बहुजन समाज से कह रहा हो की जाओ “मेरे समाज के लोगोंं आगे का सफर तुम्हें खुद तय करना है “।
दुखो से विरत रहने वाले भंते भी अश्रुधारा को नही रोक पा रहे थे।
रोते बिलखते हमने साहेब को अंतिम विदाई दी।
मान्यवर कांशीराम जी को नमन करते हुए श्रधांजली।।

 

डिस्क्लेमर:लेख में दिए गए संपूर्ण विचार लेखक के निजी विचार हैं। जानकारी और तथ्य को लेकर द फायर की किसी भी प्रकार से कोई जवाबदेही नहीं है।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here