BY- THE FIRE TEAM


वोटिंग मशीन निर्माता ES&S के मुताबिक 2000 से 2006 के बीच कुछ कस्टमर्स को ऐसे pcAnywhere नाम के रिमोट कनेक्शन सॉफ्टवेयर दिए गए. अमेरिका में 2000 से 2006 के बीच यह कंपनी वोटिंग मशीन बनाने वाली नंबर-1 कंपनी थी.

भारत में EVM हैकिंग की खबरें आपने कई बार पढ़ी और सुनी होंगी. कई बार चुनाव हारने के बाद विपक्ष आरोप लगाता रहा है कि EVM हैक की गई हैं. हालांकि चुनाव आयोग ने साफ तौर पर कहा है कि EVM हैक प्रूफ हैं. लेकिन क्या वोटिंग मशीन हैक की जा सकती हैं?

अमेरिकी वोटिंग मशीन निर्माता इलेक्शन सिस्टम एंड सॉफ्टवेयर (ES&S) ने माना है कि उसके द्वारा बेची गईं कुछ वोटिंग मशीनों में रिमोट टूल इंस्टॉल किए गए थे. यह कंपनी वोटिंग मशीन बनाने के मामले में टॉप में है.

अमेरिकी सेनेटर रॉन वाइडेन को भेजे गए एक लेटर में वोटिंग सिस्टम वेंडर ES&S ने कहा है कि 2000-2006 में लोकल सरकार को हैंडफुल मशीनें बेची गई थीं. कंपनी द्वारा सेनेटर को भेजे गए लेटर के मुताबिक 6 साल तक वोटिंग मशीन में रिमोट ऐक्सेस सॉफ्टवेयर था.

ES&S के मुताबिक 2000 से 2006 के बीच कुछ कस्टमर्स को ऐसे pcAnywhere नाम के रिमोट कनेक्शन सॉफ्टवेयर दिए गए. अमेरिका में 2000 से 2006 के बीच यह कंपनी वोटिंग मशीन बनाने वाली नंबर-1 कंपनी थी. रिपोर्ट के मुताबिक 2006 में लगभग 60 फीसदी बैलेट कास्ट ES&S सिस्टम्स से किए गए थे.
यह सॉफ्टवेयर वोटिंग मशीन में नहीं था, बल्कि इलेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम टर्मिनल में था जिसे वोटिंग मशीन को मैनेज करने के लिए यूज किया जता है.

PCAnywhere नाम का यह रिमोट सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल 2007 में बंद कर दिया गया जब अमेरिकी इलेक्शन ऐसिस्टेंस कमीशन ने इलेक्शन मैनेजमेंट टर्मिनल के लिए नई गाइडलाइन पर अमल करना शुरू किया.
कंपनी का कहना है कि PCAnywhere रिमोट सॉफ्टवेयर से हैकिंग का कोई लेना देना नहीं है.

लेकिन साइबर सिक्योरिटी जर्नलिस्ट और ऑथर किम ज़ेटर, जिनके हाथ कंपनी का यह लेटर लगा है उन्होंने कहा है, ‘PCAnywhere सिक्योरिटी के लिहाज से बुलेटप्रुफ नहीं है. 2012 में हैकर्स ने खुलासा किया था कि उन्होंने PCAnywhere का सोर्स कोड 2006 में चुरा लिया था. इसके बाद PCAnywhere सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी सिमेंटेक ने कस्टमर्स से PCAnywhere के पुराने वर्जन का सॉफ्टवेयर हटाने के लिए कहा था.

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