BY– संजीव शर्मा


लोकतंत्र में सबसे बड़ी उपलब्धि मताधिकार का प्रयोग करना है। लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के बाद स्याही का निशान गर्व से दिखाते हैं। इसी स्याही के बारे में एक दिलचस्प बात यह भी है कि भारत में सिर्फ दो कंपनियां हैं जो वोटर इंक बनाती हैं।

हैदराबाद के रायडू लैब्स और मैसूर की मैसूर पेंट्स ऐंड वॉर्निश लिमिटेड। यही दोनों कंपनियां पूरे देश को वोटिंग के लिए इंक सप्लाइ करती हैं। यहां तक कि इनकी इंक विदेशों में भी जाती है। इन कंपनियों के परिसर में इंक बनाते वक्त स्टाफ और अधिकारियों को छोड़कर किसी को भी जाने की इजाजत नहीं है।

बता दें कि वोटिंग में इस्तेमाल होने वाली इंक में सिल्वर नाइट्रेट होता है जो अल्ट्रावॉइलट लाइट पड़ने पर स्किन पर ऐसा निशान छोड़ता है जो मिटता नहीं है। ये दोनों कंपनियां 25,000 से 30,000 बोतलें हर दिन बनाती हैं और इन्हें 10 बोतलें के पैक में रखा जाता है।

दूसरे देशों में भी जाती है इंक: साल 2014 में हुए चुनावों में चीफ इलेक्शन कमिश्नर ने सिल्वर नाइट्रेट की मात्रा 20-25 प्रतिशत बढ़ा दी थी ताकि स्याही लंबे समय तक लगी रहे। हैदराबाद की कंपनी ऐफ्रिका के रवांडा, मोजांबीक, दक्षिण ऐफ्रिका, जांबिया जैसे देशों में इंक आपूर्ति करती है। साथ ही, विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ मिलकर पल्स पोलियो प्रोग्राम के लिए भी काम करती है। वहीं, मैसूर की कंपनी यूके, मलेशिया, टर्की, डेनमार्क और पाकिस्तान समेत 28 देशों में भेजती है।

अपने राज्य में नहीं कर सकते सप्लाइ: अकेले तेलंगाना चुनाव में ही स्याही की 56,130 बोतलें इस्तेमाल हो जाएंगी। रायडू लैब के CEO शशांक रायडू बताते हैं कि 10 मिलीलीटर की बोतल में मौजूद स्याही से 500 वोटरों को निशान लगाया जा सकता है।

इनकी एक्सपायरी 90 दिन के बाद होती है और निशान एक हफ्ते तक बना रहता है।’ हालांकि, चुनाव आयोग के नियमों के कारण रायडू लैब्स तेलंगाना चुनाव में इंक सप्लाइ नहीं कर सकी क्योंकि कोई भी कम्पनी अपने राज्य में यह आपूर्ति नहीं करने के लिए बंधित है।

लेखक पंजाब केसरी टीवी से हैं।

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