BYTHE FIRE TEAM


चुनाव पाँच साल की सरकार के कामकाज का लेखा-जोखा करने और अनीतियों, अत्याचारों, अतियों को दण्ड देने का भी समय है, साथ ही बेहतर राजनीतिक विकल्प और जनसेवी, संवैधानिक प्रतिज्ञाओं पर खरे, नैतिक, कर्तव्यनिष्ठ और जन समस्याओं के लिए संघर्ष करने वाले प्रतिनिधि को चुनने का भी।

अनेक सवाल हैं जो मध्यप्रदेश की जनता के दिलो-दिमाग को मथ रहे हैं। इनमे से कुछ हैं ;

  • व्यापमं घोटाले द्वारा संभावनाशील युवा पीढ़ी का भविष्य बर्बाद करने वाले अपराधियों का क्या हुआ?
  • अरबों रुपये खर्च करके बेटी बचाओ अभियान चलाने पर भी प्रदेश की बच्चियां , युवतियां, महिलायें क्यों भीषण यातनाओं की शिकार हैं?
  • किसान आत्महत्याओं में 22 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कृषि कर्मण पुरुस्कार पाने वाले प्रदेश में क्यों हुईं?
  • मध्यप्रदेश दलित उत्पीडऩ के मामलों में अग्रणी क्यों है?
  •  प्रदेश आदिवासी उत्पीडऩ के मामलों में पहले स्थान पर क्यों है?
  •  कर्मचारी, श्रमिक सब क्यों प्रदेश में खुद को ठगा और प्रताडि़त महसूस करते हैं?
  • सत्ता में आते वक्त सूबे पर पैंतीस हजार करोड़ का कर्ज था, वह पाँच गुना बढक़र पौने दो लाख करोड़ कैसे हो गया?
  • कृषि-कर्मण प्रदेश में क्यों प्रतिदिन 570 किसान भूमि हीन हो रहे हैं। सरकारी रिकार्ड से ही किसान खेत मजदूर बन रहा है और मनरेगा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है?
  • कारपोरेट घरानों और कारखाना मालिकों के इशारों पर श्रम कानूनों का उल्लंघन क्यों हो रहा है? क्यों श्रम कानून बदले जा रहे हैं?
  • आरक्षण के बहाने 20 हजार कर्मचारी क्यों बिना पदोन्नति के रिटायर कर दिये गये?
  • कि बच्चों के कुपोषण, शिशु मृत्यु दर, मामलों में, भुखमरी के मामलों में, महिला स्वास्थ्य के मामलों में इथोपिया और सोमालिया से भी बदतर हालात में क्यों है-हमारा मध्यप्रदेश?
  • इस भाजपा शासन में शिक्षा के निजीकरण का हाल यह है कि आम आदमी के बच्चों के लिए शिक्षा संभव नहीं रह गई है। शासकीय स्कूल-कॉलेजों का बुरा हाल है।
  • सरकार के बस्ते में एक लाख 10 हजार स्कूलों के बन्द करने की योजना है।
  • एकीकरण के नाम पर 46 हजार के लगभग प्राथमिक, साढ़े बासठ हजार के लगभग माध्यमिक शालायें और 1941 उच्चतर माध्यमिक तथा लगभग 3000 हाई स्कूल बंद होने के कगार पर ला खड़े किए गये हैं और शिक्षा आपके द्वार का स्वप्न नेस्तनाबूत कर दिया गया है।
  • चार हजार के करीब स्कूल मध्यप्रदेश में ऐसे हैं जहाँ एक भी शिक्षक नहीं है। प्रदेश में सरकारी आंकड़ों से ही 63,851 शिक्षकों के पद रिक्त हैं । सरकार शिक्षा के बंटाधार पर आमादा है।
    ★ इस सबके अपराधी धिक्कार, तिरस्कार की दरकार रखते हैं । 28 नवम्बर को इनके खिलाफ बटन दबाने है । भाजपा को हराना है – जहां वाम के, #सीपीएम के उम्मीदवार हैं उन्हें जिताकर नई विधानसभा में उसकी सजग उपस्थिति सुनिश्चित कराना है ।
    (#आकाशवाणी से चुनाव प्रसारण में माकपा के प्रवक्ता के संबोधन का एक अंश ।)

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