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BY-THE FIRE TEAM

प्रसिद्ध हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीतकार, पद्म भूषण से सम्मानित, सुरबहार वादक और अलाउद्दीन खान की बेटी एवं शिष्या अन्नपूर्णा देवी का अधिक उम्र और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के कारण मृत्यु हो गई.

वह 91 वर्ष की थीं तथा ब्रीच कैंडी अस्पताल में अपना इलाज करा रही थीं.

अन्नपूर्णा देवी का जन्न 1927 में मध्यप्रदेश के मैहर में हुआ था. वह अलाउद्दीन खान की चार संतानों में सबसे छोटी थीं. उनकी शादी प्रसिद्ध संगीतकार रविशंकर से हुई थी.

उनके बेटे का नाम शुभेंद्र शंकर था, जिनकी 1992 में मृत्यु हो गई. बाद में उन्होंने मैनेजमेंट कंसलटेंट रुशिकुमार पांड्या  से शादी की जिनका 2013 में निधन हो गया.

अन्नपूर्णा देवी भारतीय शास्त्रीय संगीत शैली में सुरबहार वाद्ययंत्र (बास का सितार) बजाने  वाली एकमात्र महिला उस्ताद हैं.

इनके पिता तत्कालीन प्रसिद्ध ‘सेनिया मैहर घराने’ या ‘सेनिया मैहर स्कूल’ के संस्थापक थे. यह घराना 20वीं सदी में भारतीय शास्त्रीय संगीत के लिए एक प्रतिष्ठित घराना के रूप में अपना स्थान बनाए हुए था.

वर्ष 1950 के दशक में पंडित रवि शंकर और अन्नपूर्णा देवी युगल संगीतकार के रूप में अपनी प्रस्तुति देते रहे, विशेषकर अपने भाई अली अकबर खान के संगीत विद्यालय में.

लेकिन बाद में शंकर कार्यक्रमों के दौरान संगीत को लेकर अपने को असुरक्षित महसूस करने लगे क्योंकि दर्शक शंकर की अपेक्षा अन्नपूर्णा के लिए अधिक तालियाँ और उत्साह दिखाने लगे थे.

इसके परिणाम स्वरूप अन्नपूर्णा ने सार्वजानिक कार्यक्रमों में अपनी प्रस्तुति न देने का निश्चय कर लिया.

यद्यपि अन्नपूर्णा देवी ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को कभी भी अपने पेशे के रूप में नहीं लिया और न कोई संगीत का एलबम ही बनाया, फिर भी अभी तक इन्हें भारतीय शास्त्रीय संगीत से प्रेम करने वाले प्रत्येक भारतीय से पर्याप्त आदर और सम्मान मिलता रहा है.

        प्रारम्भिक जीवन

अन्नपूर्णा देवी (रोशनआरा खान) का जन्म चैत पूर्णिमा के 23 अप्रैल, 1927 को ब्रिटिश कालीन भारतीय राज्य मध्य क्षेत्र (वर्तमान- मध्य प्रदेश) के मैहर में हुआ था. इनके पिता का नाम अलाउद्दीन खान तथा माता का नाम मदनमंजरी देवी था.

इनके एकमात्र भाई उस्ताद अली अकबर खान तथा तीन बहनें शारिजा, जहानारा और स्वयं अन्नपूर्णा (रोशनारा खान) थीं. बड़ी बहन शारिजा का अल्पायु में ही निधन हो गया,

दूसरी बहन जहानारा की शादी हुई परंतु उसकी सासु ने संगीत से द्वेषवश उसके तानपुरे को जला दिया. इस घटना से दु:खी होकर इनके पिता ने निश्चय किया कि वे अपनी छोटी बेटी (अन्नपूर्णा) को संगीत की शिक्षा नहीं देंगे.

एक दिन जब इनके पिता घर वापस आये तो उन्होंने देखा कि अन्नपूर्णा अपने भाई अली अकबर खान को संगीत की शिक्षा दे रही है, इनकी यह कुशलता देखकर पिता का मन बदल गया.

आगे चलकर अन्नपूर्णा ने शास्त्रीय संगीत, सितार और सुरबहार (बांस का सितार) बजाना अपने पिता से सिखा. मैहर में इनके पिता अलाउद्दीन खान यहां के तत्कालीन महाराजा बृजनाथ सिंह के दरबारी संगीतकार थे.

इनके पिता ने जब महाराजा बृजनाथ सिंह को दरबार में यह बताया कि उनको लड़की हुई है तो महाराजा ने स्वयं ही नवजात लड़की का नाम ‘अन्नपूर्णा’ रखा था.

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