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BY-THE FIRE TEAM


वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बृहस्पतिवार को यह बताया कि देश में गरीबी को कम करने और विकास का फायदा गरीबों तक पहुंचाने के लिये उच्च आर्थिक वृद्धि हासिल करना जरूरी है।

जेटली ने बचत एवं खुदरा बैंकों के 25वें विश्व सम्मेलन को संबोधित करते हुये कहा कि विकास की बाट जोह रहा कोई समाज जीवन की गुणवत्ता में सुधार और विकास का फल गरीबों तक पहुंचाने के लिए अनिश्चितकाल तक प्रतीक्षा नहीं कर सकता है।

उन्होंने कहा, ” भारत जैसी अर्थव्यवस्थाओं के लिए उच्च आर्थिक वृद्धि दर आवश्यक है। हम उच्च आर्थिक वृद्धि के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को गरीबी के गर्त से उबारना और उनका जीवन सुधारना चाहते हैं।

लेकिन हम विकास और प्रगति का फायदा कुछ लोगों तक सीमित रह जाने और बाकी के उससे वंचित होने के जोखिम को लेकर भी सजग है।”

जेटली का कहा कि आर्थिक वृद्धि का प्रभाव निश्चित रूप से दिखेगा लेकिन यह एक धीमी प्रक्रिया है और विकास की बाट जोह रहा समाज अनिश्चितकाल तक इसका इंतजार नहीं कर सकता है।

नरेंद्र मोदी सरकार में चलाये गये वित्तीय समावेश अभियान पर बोलते हुये जेटली ने कहा कि हमारा उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं से नहीं जुड़े लोगों को बैंक से जोड़ना,

असुरक्षित लोगों को सुरक्षित करना और पूंजीहीन लोगों को वित्त पोषित करना और जिन क्षेत्रों में सेवाएं नहीं थी, वहां सेवाएं पहुंचाना है।

उन्होंने कहा कि बैंकों खासकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत कुछ महीनों में 33 करोड़ बैंक खाते खोले। प्रारंभ में यह शून्य रकम खाते खोले गये और धीरे-धीरे लोगों ने इनमें पैसे जमा कराने शुरू कर दिए।

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में अब भी अधिकांश लोगों के पास बीमा और पेंशन की सुरक्षा नहीं है। उन्होंने जनता को बीमा सुरक्षा देने के सरकार के प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि-

जन धन योजना खातों के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा प्रणाली के तहत सस्ती प्रीमियम पर लोगों के लिये बीमा की पेशकश की गयी है।

कुल 14.1 करोड़ लोगों का दुर्घटना बीमा किया गया है जबकि 5.5 करोड़ लोगों को जीवन बीमा दिया गया है। इसके अलावा, अटल पेंशन योजना के नाम से कम प्रीमियम पर पेंशन योजना शुरू की गयी है।

पूंजीहीन लोगों को वित्त पोषित करने के लिये सरकार ने मुद्रा योजना पेश की। जेटली ने कहा कि अर्थव्यस्था को औपचारिक रूप देने के लिये सरकार ने बड़े मूल्य वाले नोट (500 और 1,000 रुपये) को बंद किया था। जिससे बड़ी मात्रा में बैंकिंग प्रणाली में नकदी आ गयी थी।

सरकार ने नयी कर व्यवस्था माल एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली पेश की। इससे विभिन्न कर एक कर में समाहित हो गये हैं। उन्होंने कहा कि-

नयी कर प्रणाली पूरी तरह से ऑनलाइन है और बहुत सी गतिविधियों को औपचारिक प्रणाली में लेकर आई है। इस पर अभी भी काम जारी है।

इस अवसर पर वित्तीय सेवा सचिव राजीव कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री जन धन योजना की सफलता में उत्साहित सरकार ने हाल में इसके दूसरी चरण की शुरुआत की है।

इसके तहत सभी लोगों के बैंक खाते खोलने का लक्ष्य रखा गया है और ओवरड्राफ्ट सुविधा को दोगुना करके 10,000 रुपये किया गया है।

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