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BY-THE FIRE TEAM

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) की आज 150वीं जयंती (150th Mahatma Gandhi Birth Anniversary) है. देश को आजादी दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले मोहन दास करमचंद गांधी का जन्म  2 अक्टूबर (2 October) को हुआ था.

यू0एन0ओ0 ने अहिंसा के इस पुजारी को सम्मान देते हुए तथा इनकी जन्म स्मृति को यादगार बनाने लिए 2 अक्टूबर को विश्व अहिंसा दिवस (Vishwa Ahinsa Diwas) के रूप में भी मनाने की घोषणा की है .

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली स्थित राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी. प्रधानमंत्री ने इसके अलावा विजय घाट भी पहुंचकर पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी.

 देश के कई हिस्सों में इस अवसर पर कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है. स्कूलों में भी बच्चे गांधी जयंती को धूमधाम से मनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी लोग स्टेटस डालकर गांधी जयंती की शुभकामनाएं एक दूसरे को देते हैं.

दरअसल गांधीजी का सम्पूर्ण जीवन हमारा मार्गदर्शन करता है, इनके त्याग और बलिदान को हम निम्नलिखित रूप में देख सकते हैं –

गांधी जी का जीवन ही उनका संदेश था.

विश्व के सभी धर्म भले ही और चीजों में अंतर रखते हों, लेकिन सभी इस बात पर एकमत हैं कि दुनिया में कुछ नहीं बस सत्य जीवित रहता है.

क्रोध और असहिष्णुता सही बुद्धि के दुश्मन हैं.

मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित है. सत्य मेरा इश्वर है, अहिंसा उसे पाने का साधन.

बस जीवन में ये याद रखना… सच और मेहनत का सदा साथ रखना… बापू तुम्हारे साथ हैं हर बच्चे के पास है… सच्चाई जहां भी है वहां उनक वास है…

देश के लिए सब कुछ त्याग जिसने देशभक्ति के लिए छोड़ा विलास, जिसने पहन काठ की चप्पल आया इक महात्मा, जो बन गया इस भारत की आत्मा.

* खादी जिसकी पहचान है, कर्म ही जिसकी शान है, सत्य और अहिंसा जिसकी जान है, हिंदुस्तान ही जिसका इमान है. गांधी जयंती की शुभकामनाएं!

बापू के सपने को फिर से सजाना है, देकर लहू का कतरा इस चमन को बचाना है. बहुत गा लिया हमने आजादी के गानों को, अब हमें भी देशभक्ति का फर्ज निभाना है.

गांधी जयंती पर मेरा सभी से बस यही कहना है, जीना है तो गांधी जैसे वरना जीना भी क्या जीना है.

* दे दी हमें आजादी बिना खडग बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल!

आज जब देश में अनेक तरह की चुनौतियाँ उभर रही हैं तो ऐसे में पुनः गाँधी का दर्शन स्वतः प्रासंगिक हो गया है.

जरूरत इस बात की है कि हम बदलाव को महसूस करें तथा सभी समस्याओं का बेहतर निदान निकालें तभी गाँधी के सपनों के भारत का निर्माण हो सकेगा और यही बापू को सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

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