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BY-THE FIRE TEAM


आज (बुधवार को) सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश जारी करते हुए कहा कि बिहार के 16 शेल्टर होम में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार और यौन शोषण से जुड़े मामलों की जांच सीबीआई करेगी।

हालाँकि मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले की जांच सीबीआई पहले ही कर रही है किन्तु बाकी मामलों में बिहार पुलिस की जांच पर असंतोष होने के कारण जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये आदेश दिया।

गौरतलब है कि पिछले 27 नवम्बर को जरूरी कार्रवाई न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि मुजफ्फरपुर जैसे कई मामले सामने आने की आशंका है।

इसके अलावा कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकार एफआईआर दर्ज करने और आरोपितों को गिरफ्तार करने के लिए जरूरी कदम नहीं उठा रही है।

कोर्ट ने 24 घंटे के अंदर एफआईआर दुरुस्त करने का भी आदेश दिया था। क्योंकि एफआईआर में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की रिपोर्ट की कोई चर्चा नहीं की गई थी।

कोर्ट ने कहा था किइस मामले में केवल पांच एफआईआर दर्ज हुए हैं जबकि 17 शेल्टर होम में बच्चों के साथ ज्यादती की रिपोर्ट आई है।

कोर्ट ने 27 नवम्बर को ही संकेत दे दिया था कि वह सभी केस सीबीआई को सौंप कर मामले की तह तक जाएगी।

बता दें कि इस सम्बन्ध में पिछले 12 नवम्बर को बिहार की पूर्व मंत्री मंजू वर्मा की अब तक गिरफ्तारी न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए बिहार के डीजीपी को तलब किया था।

यद्यपि इस केस की आरोपी मंजू वर्मा सरेंडर कर चुकी हैं। मंजू के घर से भारी मात्रा में हथियार मिले थे। मंजू वर्मा राज्य की कल्याण मंत्री थीं।

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप मामले के खुलासे के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था कुछ समय तक लापता भी रहीं।

बिहार के 14 शेल्टर होम में भी यौन शोषण और दुर्व्यवहार की शिकायतें सामने आई हैं। पिछले 31 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि बिहार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि ऑल इज नॉट वेल इन बिहार।

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