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BY-THE FIRE TEAM

लखनऊ में एपल के मैनेजर विवेक तिवारी हत्याकांड के बाद उत्तर प्रदेश डीजीपी ने पूरे राज्य में सिपाहियों की विशेष ट्रेनिंग करवाने का फैसला किया है.

इसमें उन्हें वर्दी का गरुर दूर करने के साथ लोगों से पेश आने के तौर-तरीके सिखाए जाएंगे. ट्रेनिंग सोमवार से लखनऊ में शुरू होगी. पहले चरण में 6 हजार सिपाही शामिल होंगे.

गौरतलब है कि लखनऊ में विवेक तिवारी को पुलिस के एक कांस्टेबल ने इसलिए गोली मार दी थी क्योंकि उन्होंने उसके कहने पर अपनी कार नहीं रोकी थी. इस घटना के बाद से उत्तर प्रदेश पुलिस की छवि पर गहरा धक्का लगा है साथ ही योगी सरकार की भी अच्छी-खासी किरकिरी हुई.

इस मुद्दे पर डीजीपी ओपी सिंह से जब सवाल पूछा गया कि आपको क्या लगता है कि अगर पुलिस की बेहतर ट्रेनिंग हुई होती तो विवेक तिवारी के साथ जो हुआ वह नहीं होता ?

इस पर डीजीपी ने जवाब दिया, ‘हां सही बात है, मैं यह मानता हूं कि कैसे पुलिस को किसी कार या वाहन को रोकना है. कैसे उसे सर्च करना है. हमारा टैक्टिकल ऑपरेशन क्या होगा. इन सब चीजों का ध्यान रखना जरूरी है.

हमारा उस समय मूवमेंट क्या और कैसा होगा यह ध्यान में रखा जाएगा ,ये सब अब हमारी ट्रेनिंग का हिस्सा होगा.

आपको बताते चलें कि विवेक तिवारी हत्याकांड से पहले भी पुलिस कई वजहों से बदनाम रही है.  जैसे – एंटी रोमियो मुहिम में ही पुलिस ने कई लोगों की खुलेआम बेइज्जती की,

नोएडा में एक सब-इंन्सपेक्टर ने फर्जी एनकाउंटर में जिम ट्रेनर को गोली मार दी, मुरादाबाद में थाने के अंदर प्रेमी जोड़े की पिटाई कर दी, हापुड़ में मॉब लिचिंग में संवेदनहीनता दिखाई,

अलीगढ़ में लाइव एन्काउंटर शूट किया गया और मेरठ में एक छात्र को इसलिए पीटा गया क्योंकि उसकी दोस्त किसी दूसरे धर्म की थी.

डीजीपी ओपी सिंह ने भी माना कि अगर कोई पुलिसकर्मी ऐसी सोच रखता है तो वह हमारे लिए बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि मेरठ जैसी और भी घटनाएं हो सकती हैं, इसलिए इन जैसे सभी मुद्दों पर, धर्म निरपेक्षता पर, संविधान-कानून के बारे में जानकारी दें ताकि उनका माइंडसेट बदल सके.

उन्होंने बताया कि सोमवार से लखनऊ में एडीजी राजीव कृष्णा ट्रेनिंग कराएंगे जिन्होंने खुद कोर्स तैयार किया है. ओपी सिंह ने कहा कि वह खुद इसमें स्वयं लेक्टर देंगे. करीब 20 बैच चलाए जाएंगे. इसमें आईजी, एसएसपी, एडिश्ननल एसपी और सीओ वो सब इसमें लेक्चर देंगे.

ट्रेनिंग के दौरान  मॉब लिचिंग के हालात में उनकी ट्रेनिंग, उनका सोशल मीडिया पर व्यवहार, जनता से बर्ताव, सांप्रदायिक तनाव की स्थिति में उनका कर्तव्य और व्यवहार, वर्दी का गुरूर का छोड़कर प्रोफेशनल तरीके से काम, महिलाओं का सम्मान करना, दोस्त या प्रेमी युवक और युवती को अपराधी न समझना जैसे विषय शामिल हैं.

इस घटना के बाद जिस तेजी के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपनी कार्यप्रणाली को बदलने की कोशिश की है वह एक बेहतर कदम माना जा सकता है. अब यह तो आने वाला समय ही तय करेगा कि इन सुधारों की प्रासंगिकता कितनी कारगर होगी ?

निश्चित तौर पर विवेक के साथ जो वारदात हुई है वह कई जटिल प्रशनो की ओर इशारा करती है जिसकी व्यापक पड़ताल किये जाने की जरूरत है ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृति भविष्य में न हो सके.

 

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