PHOTO: THE FIRE

BYTHE FIRE TEAM

बीते 3 अक्टूबर की रात करीब 10:30 बजे लखनऊ के ठाकुरगंज इलाके में दो सगे भाइयों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। इन दो सगे भाइयों में एक का नाम अरमान गाजी और दूसरे का नाम इमरान गाज़ी है।

बेखौफ बदमाश इन दो सगे भाइयों को पहले बेरहमी से आधे घण्टे तक पीटते रहे और उसके बाद इनके खोपड़ी में गोली मार दी। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान ना तो आसपास के लोग बीच-बचाव के लिए आए और ना ही पुलिस समय पर पहुंच सकी।

बदमाशों के बेखौफ होने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि घटनास्थल से ठाकुरगंज थाना महज 400 मीटर की दूरी पर ही पड़ता है। परन्तु फिर भी वह इससे जरा भी नहीं हिचके।

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान करीब 50 से 60 मिनट का समय लगा परंतु फिर भी समय पर पहुंचने का दावा करने वाली यूपी पुलिस यहां नहीं आ पाई। यह दर्शाता है कि प्रशासन किस ढ़िलाई के साथ अपना कार्य कर रहा है।

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आज पोस्टमार्टम के बाद जब लोगों ने सरकार से मारे गए इन दो सगे भाइयों के परिवार को मुआवजा तथा नौकरी की मांग का मुद्दा उठाया तो इस पर पुलिस प्रशासन ने उनके साथ काफी नकारात्मक व्यवहार किया। सरकार से सवाल यही है कि क्या वह जाति या धर्म के नाम पर लोगों को मुआवजा और नौकरी देती है?

क्योंकि यदि विवेक तिवारी की पत्नी को 40 लाख और एक सरकारी नौकरी मिल सकती है तो क्यों नहीं उस परिवार के सदस्य को मुआवजा या अन्य सरकारी सहायता का आश्वासन दिया जा सकता है जिसने अपने दो बेटों को खोया है?

दरसल पिछले दिनों विवेक तिवारी जोकि एक कंपनी में नौकरी करते थे, को रात में ही लखनऊ के गोमतीनगर इलाके में एक पुलिस वाले ने गोली मार दी थी जिससे उनकी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उत्तर प्रदेश के अनेक मंत्रियों से लेकर विपक्ष के अखिलेश यादव तक पीड़ित परिवार के घर गए थे। और सरकार की तरफ से मुआवजा राशि और एक सरकारी नौकरी का ऐलान भी बहुत जल्द कर दिया गया था।

परंतु जब इस घटना के चंद घंटों बाद लखनऊ में ही दो सगे भाइयों को मार दिया जाता है तब ना तो सरकार की तरफ से कोई मंत्री परिवार से मिलने जाता है और ना तो किसी भी प्रकार की कोई मुआवजा राशि का ऐलान होता है। यहां प्रश्न यही उठता है कि क्या जाति और धर्म के नाम पर भेदभाव नहीं हो रहा है? क्या पीड़ित परिवार को सही मायने में सरकारी मदद मिल पा रही है? क्योंकि देखकर तो ऐसा नहीं लग रहा है।

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