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BY- SAEED ALAM

8 नवंबर 2016 को की गई प्रधानमंत्री के द्वारा  नोटबंदी की घोषणा अपना व्यापक अर्थ रखती है।

जिस तरीके से देश में काला धन, भ्रष्टाचार ,विभिन्न विभागों में फैला घूसखोरी का कल्चर तथा आतंकी गतिविधियों में लिप्त कई आतंकी संगठनों, अलगाववादियों,नक्सलवादियों इत्यादि पर लगाम लगाकर नियंत्रित करने के लिए उन्होंने नोटबंदी की वह काबिले तारीफ है।

किंतु इस शासनिक घोषणा की वजह से सबसे अधिक परेशानी का सामना जनसामान्य – मसलन दिहाड़ी मजदूर, श्रमिक, फल वाले,रेहड़ी वाले,सब्जी बेचने वाले एवं ऐसे ही कई दैनिक मजदूरी पर अपनी जीविका चलाने वाले लोगों को करना पड़ा।

यहां तक कि लोगों को अपने पैसे निकालने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी ।

इसके अलावा कई मरीजों को पैसे के अभाव में इलाज से वंचित होकर अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ा। आखिर जब यह इतना सकारात्मक कदम था तो फिर इसे बिना किसी व्यवस्थित विकल्प के लागू करना कैसे यथोचित कहा जा सकता है?

लोकतंत्र का  मूल तत्व जनकल्याण करना है तो फिर वह फलीभूत क्यों नहीं किया गया? इसके अलावा प्रधानमंत्री का वादा भी झूठा साबित हुआ जब उन्होंने कहा कि-भाइयों और बहनों मुझे 50 दिन का मौका दीजिए उसके बाद सारी चीजें व्यवस्थित हो जाएंगी।

आज वर्ष 2018 का दौर चल रहा है जो लगभग 2 साल पूरे होने को है नोटबन्दी की घोषणा के किंतु राष्ट्रीय अथवा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किए गए सर्वेक्षण में यह बात उभरकर सामने आई है कि नोटबंदी देश के लिए घातक सिद्ध हुई और इसने अर्थव्यवस्था की विकास दर को धीमा किया तथा देश को पीछे ले जाने का कार्य किया।

इन्हीं तथ्यों को लेकर कांग्रेस ने एक कड़ा विरोध प्रदर्शन जारी करने का फैसला किया है ।युवा कांग्रेस  आने वाले लोकसभा इलेक्शन तक अपना प्रदर्शन करती रहेगी और चुनाव में इसे अपना एजेंडा भी बनाएगी।

लेकिन ऐसा नहीं है क़ि नोटबंदी से केवल नुकसान ही हुआ है। कुछ एजेंसियों ने डाटा जारी किया है जिससे पता चलता है की बहुत से सकारातमक परिणाम इससे आये हैं जैसे कि-

  • 56 लाख नए Tax payers जुड़े।
    * 24.7% ज़्यादा Tax returns फ़ाइल हुई ।
    * ब्याज दर 100BPS घटी।
    * card ( डेबिट – क्रेडिट ) कार्ड से लेन देन 65% बढ़ा ।
    * banks का deposit 3 लाख करोड़ रु बढ़ गया ।
    * 16000 करोड़ रु बैंक में वापस ही नही आये।
    * 4.73 लाख bank transactions संदिग्ध है और जांच के दायरे में हैं।
    * 3 लाख से ऊपर के सभी deposits की जांच चल रही है।
    * Jewellery की डिमांड 80% से ज़्यादा बढ़ी।
    * Cashless Digital Payment में 56% की वृद्धि।
    * म्यूच्यूअल funds के AUM में 54% की वृद्धि।
    * 1 करोड़ से ज़्यादा नए श्रमिक EPF और ESIC से जुड़े।
    * Income Disclosure Scheme 2015 में 3770 करोड़ रु आये।
    * 73 करोड़ से ज़्यादा बैंक खाते आधार कार्ड से लिंक हुए ।
    *PMGKY प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 4900 करोड़ रु आये।
    *34 बड़ी CA Firms जांच के दायरे में ।
    *460 बैंक कर्मी घोटाले करते पकड़े गए।
    * 5800 कंपनियां Withdrawal Handsome की जांच के दायरे में ……. इन्होंने नोटबन्दी के बाद रातों रात 4573 करोड़ रु अपने खातों में जमा कराए और फिर निकाल लिए।
    * 25 लाख से ज़्यादा जमा करने वाले 1.16 लाख लोगों को नोटिस
    * 1 करोड़ रु से ज़्यादा जमा करने वाले 5000 लोगों को नोटिस
    * OCM – Operation Clean Money के तहत 18 लाख से ज़्यादा खाते जांच के दायरे में ।
    * 5.56 लाख ऐसे लोग चिन्हित जिनके deposits उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक
    * 35000 Shell कंपनियां बर्खास्त
    * 2.1 लाख shell कंपनियां deregistered
    * 1.2 लाख shell कंपनियां जांच के घेरे में , कभी भी गिर सकती है गाज * 42,448 करोड़ की Undisclosed income की घोषणा लोगों ने की
    * 33,028 करोड़ की Undisclosed income विभाग ने पकड़ी ।
    * 2.89 लाख करोड़ के deposits जांच के दायरे में
    * नोटबन्दी के बाद से अब तक 2,12,360 करोड़ का काला धन जप्त किया जा चुका है और लगभग 5 लाख करोड़ जांच के घेरे में …………
    हाल ही में अपने घरों में नजरबंद किए गए पांच बुद्धिजीवियों के पत्रों से पता चला है कि नोटबंदी ने नक्सलियों को भी बहुत प्रभावित किया।

उपरोक्त तथ्यों से पता चलता है कि सरकार की मंशा जो भी किन्तु इसका सबसे ज्यादा नकारात्मक प्रभाव देश की आम जनता पर पड़ा। जरुरत इस बात की है क़ि सरकार अपनी प्रतिबद्धता समझे और उसे लागु करे।

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