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BYTHE FIRE TEAM

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को सनसनीखेज कठुआ सामूहिक बलात्कार एवं हत्या मामले की नए सिरे से जांच के लिये दायर याचिका खारिज कर दी। इस मामले के एक आरोपी ने पहले की गयी जांच को दुर्भावना से प्रेरित बताते फिर से जांच की मांग की थी।

न्यायमूर्ति उदय यू ललित और नयायमूर्ति धनन्जय वाई चंद्रचूड की पीठ ने मामले में दो अन्य आरोपियों की एक अन्य याचिका भी खारिज कर दी जिसमें मामले की जांच एक स्वतंत्र एजेंसी को देने की मांग की गई थी।

अभियुक्त ने अपनी याचिका में कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 21 में निष्पक्ष जांच के साथ-साथ आरोपी को मुकदमा की गारंटी है और यह मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए बिल्कुल जरूरी है।

“इसलिए, जांच उचित, पारदर्शी और न्यायसंगत होनी चाहिए क्योंकि यह कानून के नियम की न्यूनतम आवश्यकता है। जांच एजेंसी को दंडित और पक्षपातपूर्ण तरीके से जांच करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।”

भाषा खबर के अनुसार   दोनों याचिकायें खारिज करते हुये पीठ ने कहा कि आरोपी सुनवाई के दौरान निचली अदालत के समक्ष यह मुद्दा उठा सकता है।

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मामले की जांच कर रही राज्य पुलिस की अपराध शाखा ने सात लोगों के खिलाफ मुख्य आरोपपत्र दायर किया और एक किशोर के खिलाफ अलग से आरोपपत्र दायर किया था जिसमें बताया गया था कि किस तरह नाबालिग लड़की को कथित तौर पर अगवा किया गया, नशे की दवा दी गई और एक पूजा स्थल के भीतर उससे बलात्कार किया गया। बाद में लड़की की हत्या कर दी गई थी।

 

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