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BYTHE FIRE TEAM

उच्चतम न्यायालय ने गुरूवार को उस अनुरोध पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसमें जनहित याचिकाओं की सुनवाई के लिए नए दिशानिर्देश तय करने की मांग की गई थी।

पूर्व सॉलिसिटर जनरल और वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ से अनुरोध किया था कि जनहित याचिकाओं से निपटने के लिए दिशानिर्देश होने चाहिए, क्योंकि कुछ लोग या संगठन पूरे देश की नुमाइंदगी करते हुए अदालत का रुख करते हैं और कोई बड़ा आदेश पारित कर दिया जाता है।

कुमार ने 2जी और कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले के मामलों में उच्चतम न्यायालय के आदेशों का हवाला दिया और न्यायमूर्ति एस के कौल एवं न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की सदस्यता वाली पीठ को बताया कि इस मामले के पक्षों, जिन्हें सुना भी नहीं गया, पर पड़ने वाले प्रभाव पर गौर किए बगैर ही आवंटन रद्द करने वाले आदेश पारित कर दिए गए।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे आदेश और फैसले लाइसेंस धारकों एवं अन्य को प्रभावित करते हैं। लेकिन उन्हें नोटिस तक जारी नहीं किया गया। यह देखा जाना चाहिए कि कम से कम नोटिस जारी किए जाएं। उच्चतम न्यायालय के नियमों का पालन किया जाना चाहिए।’’

पीठ ने कहा, ‘‘सॉरी, हम ऐसा नहीं करने वाले।’’

एक केस के सिलसिले में पैरवी के लिए आए पूर्व विधि अधिकारी ने यह अनुरोध तब किया जब उनका मामला खारिज कर दिया गया।

 

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