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BYTHE FIRE TEAM

मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार तीन तलाक और निकाह हलाला के सम्बन्ध में संसोधन करना चाहती है ताकि उन पर होने वाले अत्याचार को रोका जा सके.

इसके लिए अभी सदन में बहस जारी है किन्तु इस बिल के प्रारम्भ से ही कांग्रेस एवं अन्य राजनितिक दल बीजेपी पर राजनीती करने का आरोप लगा रही हैं.

चूँकि शरीयत के आधार पर लागु की गई निकाह हलाला की प्रथा किसी समय के लिए बेहतर व्वस्था रही होगी किन्तु अधिकतर पुरुषों ने इसका दुरूपयोग ही किया है.

जिसके कारण महिलाओं का अत्यधिक शारीरिक एवं मानसिक शोषण हुआ है ऐसे में मुस्लिम महिलाओं ने एकजुटता दिखते हुए न्यायालय में याचिका दायर की तभी से सरकार इसको हटाने के लिए प्रयासरत है.

ऐसे में इस बिल में मोदी सरकार की तरफ से कई संशोधन भी किए गए थे. कांग्रेस लगातार इसके जरिए मोदी सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाती रही है क्योंकि कुछ मुस्लिम संगठनो ने कांग्रेस का साथ दिया.

इन मुस्लिम धर्मगुरुओं का यह तर्क रहा कि सरकार ने उनके शरीयत में कोई बदलाव करने की कोशिश की तो निश्चित तौर पर यह उनके धर्म पर हमला माना जायेगा.

दूसरी ओर सरकार का यह कदम संविधान के प्रावधानों के भी प्रतिकूल सिद्ध होगा .वहीँ सरकार ने कांग्रेस को मुस्लिम महिलाओं को हक ना देने वाली पार्टी बताया है.

 फिर भी केंद्र सरकार की नरेंद्र मोदी कैबिनेट ने बुधवार को तीन तलाक से संबंधित अध्यादेश को पारित कर दिया है. तीन तलाक बिल पिछले दो सत्रों से राज्यसभा में पास नहीं हो पाया था. सूत्रों की माने तो ऐसे में अब कैबिनेट ने इस पर अध्यादेश पारित किया है.

तीन तलाक के मुद्दे पर मोदी सरकार काफी आक्रामक रही है और इसके लिए सरकार की ओर से बिल भी पेश किया गया था. हालांकि, कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों के विरोध के बाद इस बिल में संशोधन किया गया था.

संशोधन के बावजूद भी ये बिल राज्यसभा में पास नहीं हो पाया था. हालांकि, लोकसभा में ये बिल पहले ही पास हो चुका है. तीन तलाक बिल इससे पहले बजट सत्र और मॉनसून सत्र में पेश किया गया था, लेकिन राज्यसभा में पास नहीं हो सका था.

भारतीय जनता पार्टी की तरफ से लगातार कांग्रेस पर तीन तलाक बिल को अटकाने का आरोप लगाया जा रहा है. इसको लेकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कांग्रेस पर निशाना साध चुके हैं.

आपको बताते चलें कि नए बिल में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) के मामले को गैर जमानती अपराध तो माना गया है लेकिन संशोधन के हिसाब से अब मजिस्ट्रेट को जमानत देने का अधिकार होगा.

संशोधित तीन तलाक बिल की खास बातें-

  • ट्रायल से पहले पीड़िता का पक्ष सुनकर मजिस्ट्रेट दे सकता है आरोपी को जमानत.
  •  पीड़िता, परिजन और खून के रिश्तेदार ही एफआईआर दर्ज करा सकते हैं.
  •    मजिस्ट्रेट को पति-पत्नी के बीच समझौता कराकर शादी बरकरार रखने का अधिकार होगा.
  •     एक बार में तीन तलाक बिल की पीड़ित महिला मुआवजे की हकदार

(साभार-आज तक)

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