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आम आदमी पार्टी से शिक्षा मंत्री बने मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी पर आप नेताओं में भारी आक्रोश है. इसको लेकर चारों तरफ आम आदमी पार्टी के नेताओं ने मनीष सिसोदिया के गिरफ्तारी के विरुद्ध मोर्चा खोल रखा है.

आप नेता संजय सिंह ने ट्वीट करके वीडियो जारी किया है जिसमें वह पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कह रहे हैं कि-

“आया था गंगा का लाल बनकर रह गया अडानी का दलाल बन कर. हम अडानी के नौकरों से नहीं डरते हैं.”

बताते चलें कि 26 फरवरी को गिरफ्तार मनीष सिसोदिया को लेकर आप कार्यकर्ता लगातार भाजपा मुख्यालय के बाहर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन

करते हुए नारे लगा रहे हैं कि- “मोदी जब भी डरता है, फर्जी केस में गिरफ्तारी करता है.” संजय सिंह ने बताया कि मनीष सिसोदिया का गुनाह यह है कि

वह दिल्ली के लाखों-करोड़ों बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के प्रयास में दिन-रात लगे हुए हैं. हम भाजपा को बता देना चाहते हैं कि उसकी किसी भी कार्रवाई से ना हम झुकेंगे और ना ही डरेंगे.

नरेंद्र मोदी अपने नजदीकी दोस्त अडानी जिसने लाखों-करोड़ों का घोटाला किया है, उसके विरुद्ध सीबीआई कार्यवाही क्यों नहीं कर रहा है.?

मैं खुले तौर पर कहता हूं कि पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार अडानी की नौकर है. अगर ऐसा नहीं होता तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट, ईडी ने अडानी पर अभी तक क्या कार्यवाही किया,

इसको देश पूछ रहा है. इनको बताने में इनको परहेज क्यों है.? अडानी ने एक ही पते पर छह कंपनियों को खोलकर ₹42,000 करोड़ हड़प लिया.

इस पर ईडी और सीबीआई क्यों चुप है? जिस अडानी के पोर्ट से हजारों करोड़ के ड्रग बरामद हुई उस पर ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स, नारकोटिक्स डिपार्टमेंट अपनी चुप्पी क्यों साधे हुए हैं?

वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी को लेकर ट्वीट करते हुए लिखा है कि मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी ने साबित कर दिया है कि भाजपा सरकार 2024 से पहले ही अपनी हार मान चुकी है.

यही वजह है कि अलग-अलग प्रदेशों में विपक्षी दल राजनीतिक शक्तियों को झूठे मुकदमे में फंसाने का काम कर रही है लेकिन संघर्षी लोग जेल जाने से कभी नहीं डरते हैं. आखिर सत्य को कब तक गिरफ्तार रखा जा सकता है.?

यहां याद दिला दें कि दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष को 100 करोड़ आबकारी नीति घोटाला मामले में सीबीआई ने गिरफ्तार किया है.

फिलहाल या तो न्यायालय तय करेगा कि मनीष सिसोदिया दोषी है या नहीं, किंतु दूसरी तरफ यह सवाल भी खड़ा है कि 81000 करोड़ का कारपोरेट घोटाला करने वाले घोटालेबाजों के विरुद्ध भाजपा सरकार का मौन व्रत टूटेगा या नहीं.

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