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गोरखपुर: ‘तीसरी आंख मानवाधिकार संगठन’ के संस्थापक महासचिव शैलेंद्र कुमार मिश्र ने कहा कि सीएम सिटी गोरखपुर के उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग उत्तर प्रदेश में

प्रधान लेखाकार व मुख्य लेखा परीक्षक की वार्षिक लेखा परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार व्याप्त भ्रष्टाचार करने सहित, नाबालिग नियुक्ति, अनाधिकृत रूप से पद परिवर्तन

जैसे गंभीर अपराधों के विरुद्ध 13 जुलाई, 2021 से सत्याग्रह संकल्प को चरणबद्ध ढंग से चलाया जा रहा है. किन्तु व्यवस्था के पोषकों द्वारा इसकी अनदेखी, तानाशाही, हठधर्मी क्रूरता

आदि का वयवहार अंग्रेजी तानाशाही को बयां करती नजर आ रही है जो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के मुंह पर कालिख पोतने के समान है.

ऐसे कार्यशैली को यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को खुले तौर पर बाधित करने का कूट रचित अपराध है.

‘सत्याग्रह संकल्प’ में विशेष रुप से उपस्थित राजेश द्विवेदी अधिवक्ता उच्च न्यायालय उत्तर प्रदेश इलाहाबाद ने 376 दिनों के सत्याग्रह संकल्प पर शासकीय,

प्रशासकीय तंत्र की खामोशी और नजरअंदाजी पर तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह कृत्य लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का चीरहरण करने जैसा है.

इस तरह के मगरूर व्यवस्था के पोषकों को अंग्रेजी शासन काल की दमनकारी नीति के अंत के इतिहास से सीख लेनी चाहिए.

शासकीय तंत्र को स्वस्थ लोकतंत्र के लिए संगठन के क्रमिक धरना और आवाज को प्राथमिकता देते हुए लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर अमल करना चाहिए.

संगठन को कमतर आंकना श्रेयस्कर नहीं होगा “सूरज हूं, जिंदगी की रकब छोड़ जाऊंगा, डूब भी गया तो, चमक छोड़ जाऊंगा, इससे सीख लेने की जरूरत है.

अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब संगठन दमनकारी नीति का अंत कर भ्रष्टाचारियों को जेल की सलाखों में पहुंचाने से गुरेज नहीं करेगा.

कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि के रुप में हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश द्विवेदी, विशिष्ठ अतिथि डॉ0 जेपी नायक, प्रदेश उपाध्यक्ष हीरा लाल गौड़,

जिलाध्यक्ष जिला मंत्री डॉ0 शोभित, जिला मंत्री श्रीवास्तव, सुबास यादव, कैलाश यादव उ0प्र0 मा0शि0 संघ, चिकित्सा जगत से सैयद वसीम इक्बाल,

संगठन के संस्थापक महासचिव शैलेंद्र कुमार मिश्रा, अनूप शुक्ला, वरिष्ठ कार्यकर्ता जियाउद्दीन अन्सारी, इत्यादि भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे.

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