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BY-THE FIRE TEAM


राम मंदिर निर्माण को लेकर दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में संतों की दो दिवसीय बैठक शनिवार को शुरू हुई। इस दौरान रामजन्म भूमि न्यास के प्रमुख रामविलास वेदान्ती ने कहा कि राम मंदिर निर्माण दिसंबर से शुरू हो जाएगा।

यह बिना किसी अध्यादेश के आपसी सहमति से होगा। अयोध्या में राम मंदिर और लखनऊ में मस्जिद का निर्माण होगा। राम मंदिर निर्माण से जुड़े एक सवाल पर योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा, “अगर न्यायालय से इस मामले में देरी हुई तो संसद में जरूर इसका बिल आएगा।

इसे आना भी चाहिए। राम जन्मभूमि पर राम का मंदिर नहीं बनेगा तो किसका बनेगा ? संतों, राम भक्तों ने संकल्प किया, अब राम मंदिर में और देर नहीं, मुझे लगता है, इसी साल इस मामले में शुभ समाचार मिलेगा।”

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि 1992 के पहले की न्यायिक परिस्थितियां फिर से बन रही हैं। उस समय राम मंदिर निर्माण को लेकर टाल-मटोल हुई थी। इसी के चलते वहां उस वक्त कुछ ऐसे नतीजे आए थे, जिसकी कई प्रकार से व्याख्या की जा सकती है।

उसी प्रकार की देरी फिर से हमारे धर्म में सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से हो रही है। ये राजनीतिक मुद्दा नहीं है। पहले सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर से इस मामले में अलग बेंच द्वारा सुनवाई करने की बात कही थी।

मैं मानता हूं कि सुप्रीम कोर्ट के अपने अलग मुद्दे हो सकते हैं। अब जनवरी से मामले की सुनवाई करने की बात कर रहे हैं। इससे हिंदू संगठनों में नाराजगी पैदा हुई। आरएसएस ने उसी को लेकर अपना पक्ष रखा है।”

अयोध्या में सरयू नदी के तट पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ छह नवम्बर को भगवान राम की मूर्ति की आधारशिला रखेंगे। मूर्ति की ऊंचाई 151 मीटर होगी। इसकी लागत 330 करोड़ रुपए है। यह मूर्ति कांस्य धातु से बनेगी।

उत्तरप्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा- राम मंदिर मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में है। इस मामले में हम कुछ नहीं कर सकते।

लेकिन कोई अयोध्या में भगवान राम की भव्य मूर्ति बनने से नहीं रोक सकता। अगर इसे कोई रोकता है तो हम देख लेंगे। अयोध्या का विकास करने से हमें कोई नहीं रोक सकता।

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