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विदेशी आक्रमणकारियों के नाम पर शहरों, सड़कों, इमारतों तथा संस्थानों के नाम बदलने के लिए आयोग बनाने की मांग को लेकर भाजपा नेता अश्वनी उपाध्याय ने सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल किया था.

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख लहजे में कहा है कि आप इस याचिका से क्या हासिल करना चाहते हैं.? क्या देश में और कोई मुद्दा नहीं है.?

यह सच है कि भारत पर कई बार हमला किया गया और विदेशी आक्रांताओं ने इस पर राज भी किया.  ये सब इतिहास का हिस्सा है. अब उस पर जिक्र करने का क्या फायदा.?

देश कभी भी अतीत का बंधन नहीं हो सकता है. देश में घोषित धर्मनिरपेक्षता, संवैधानिकता तथा राज्य की कार्यवाही में निष्पक्षता से जुड़ा हुआ है.

आज देश को आगे बढ़ाने की जरूरत है. इस विषय में जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है. आपकी उंगलियां एक विशेष समुदाय के विरुद्ध उठाई जा रही हैं.

क्या आप फिर से देश को उबलते हुए देखना चाहते हैं.? आप अतीत के बारे में चिंतित हैं जबकि वर्तमान पीढ़ी पर इसका बोझ डालने के लिए खुदाई का काम कर रहे हैं. इससे देश में शत्रुता तथा नफरत पैदा होगी.

वहीँ जस्टिस बीवी नाग रत्ना ने बताया कि हिंदुत्व एक जीवन पद्धति है जिसकी वजह से भारत ने सभी को आत्मसात कर लिया. उसी के परिणाम है कि हम साथ रह पा रहे हैं.

अंग्रेजों ‘फुट डालो और राज करो’ की नीति ने समाज में सिर्फ फूल डाला है संविधान का अनुच्छेद 32 व्यक्ति के मूल अधिकारों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी उठा रहा है.

बताते चलें कि याचिकाकर्ता एडवोकेट अश्वनी उपाध्याय ने उदाहरण देकर कहा था कि जिन लोगों ने हमारे देश पर आक्रमण किया, लूटपाट मचाई, महिलाओं के साथ बलात्कार किया.

उनके नाम पर सड़कें और शहरों के नाम रखे गए हैं जो कहीं ना कहीं संविधान द्वारा प्रदत्त व्यक्ति को गरिमा से जीने और संस्कृति के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता हुआ नजर आता है.

अश्वनी ने 1,000 से अधिक नामों जैसे बाबर रोड, हुमायूं रोड, अकबर रोड, जहांगीर रोड, शाहजहां रोड, बहादुर शाह जफर रोड, शेरशाह सूरी रोड, औरंगजेब रोड,

तुगलक रोड, सफदरजंग रोड, नजफगढ़ रोड, चेम्सफोर्ड रोड, हेली रोड इत्यादि का हवाला देकर कहा कि इन शहरों, जगह, सड़कों के नाम को रिनेमिंग कमीशन बनाकर बदला जाना चाहिए तभी अनुच्छेद 21, 25 और 29 के तहत दिए गए अधिकारों की रक्षा हो पाएगी.

दरअसल ऐतिहासिक गलतियों को सुधारने का यही एक माध्यम है. याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि अजातशत्रु नगर का नाम बर्बर आक्रांता बेगू के नाम पर रखकर बेगूसराय कहा जाता है,

जबकि प्राचीन शहर नालंदा बिहार का नाम शरीफ उद्दीन के नाम पर बिहार शरीफ कर दिया गया. इसी राज्य में मिथिलांचल के सांस्कृतिक शहर द्वार बंग का नाम बदल करके दरभंगा खान के नाम पर दरभंगा कर दिया गया.

इसके अतिरिक्त हरिपुर नाम के धार्मिक शहर को हाजी शमसुद्दीन शाह ने हाजीपुर किया. वैदिक शहर के रूप में चर्चित विजयपुर का नाम भी बदलकर मुजफ्फर खान के नाम पर मुजफ्फरपुर कर दिया गया.

वास्तविकता यह है कि अफगानों, मुगलिया हुकूमत और उसके बाद ब्रिटिश शासकों ने अपने जुल्म का लोहा मनवाने तथा भारतीयों का मनोबल तोड़ने के लिए इतने बड़े परिवर्तन को अंजाम दिए.

इनका मकसद था कि भारतीय संस्कृति और इतिहास को सदैव के लिए मिटा दिया जाए. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इन सारे तर्कों को यह कह कर खारिज कर दिया कि

हमारे संविधान की प्रस्तावना में सद्भावना शब्द का प्रयोग किया गया है जो देश की एकजुटता तथा आपसी मेलजोल को नेतृत्व करता है, हमें इस संविधानिक मूल मर्म को कभी नहीं भूलना चाहिए.

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